Friday, September 3, 2010

‘स्पॉट फिक्सिंग’ या ‘फैन्सी फिक्सिंग’

‘स्पॉट फिक्सिंग’ या ‘फैन्सी फिक्सिंग’
सटोरिये खिलाडियों कि मिली भगत से इस प्रकार का प्रबंध करते हैं  जिससे मैच का परिणाम पहले ही तय हो जाता है  कि प्रतियोगिता में किस टीम को हार और किस टीम को जीत मिलनी है । इस प्रकार के फिक्सिंग को ‘मैच फिक्सिंग’ ( जिसमे नतीजा पहले ही तय (फिक्स) हो  जाता है ) कहते हैं । पर स्पॉट फिक्सिंग एक खास प्रकार कि फिक्सिंग होती है जिसे सटोरिये  ‘फैंसी फिक्सिंग’ भी कहते हैं। जैसा कि नाम से स्पस्ट है  ‘स्पॉट फिक्सिंग’ में खेल के दौरान की कुछ गतिविधियों पर बाजी लगायी जाती है मसलन – पिच पर कितने खिलाडी चश्मा पहन के उतरेंगे , कौन सा खिलाडी मैच के दरमयान चोटिल होगा, कौन सा खिलाड़ी मैदान पर कहां खड़ा होगा, कौन सी बॉल ड्रॉप करनी है या नो बॉल फेंकनी है यहाँ तक कि मैदान पर कितने खिलाडी ‘थूकेंगे’  ये सारे स्‍पॉट फिक्सिंग के तहत आते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की भ्रष्टाचार एवं सुरक्षा शाखा (ACSU) का मानना है कि मैच फिक्सिंग पर प्रतिबंद तो लगाया जा सकता है परन्तु स्पॉट फिक्सिंग पर एक हद तक ही नजर रखी जा सकती है।
ACSU खिलाडियों द्वारा किए जाने वाले संदेहास्पद हरकतों पर नज़र तो रख सकता है जैसे कि 40-50 या 90-100 के बीच खिलाडी अगर आउट होता है या बिना खता खोले आउट हो जाता है या नो बॉलफेकने जैसी घटनाएँ पर ये सभी क्रिकेट का हिस्सा हैं और इनपर कोई भी शर्त लगा सकता है जो उसकी किस्मत पर निर्भर करता है कि उसका पूर्वानुमान सही होता है या गलत ऐसे में कोई भी ये अंदाजा नहीं लगा सकता कि ये सभी पूर्व नियोजित है या अनायास घटित होने वाली घटनाएँ जब तक कि किसी प्रकार का कोई खुलासा स्वयं खिलाडी या सटोरियों कि तरफ से नहीं होता।

बे अदब

दुनिया की हाँ में हाँ न मिलाया मैंने
सही को सही और ग़लत को ग़लत जो बताया मैंने
इस कदर दुनिया से मिला प्यार बेशुमार
कि कहते हैं अदब से सब बे-अदब मुझको
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Duniya ki haan me haan na milaya maine
sahi ko sahi aur galat ko galat jo bataya maine
is kadar duniya se mila pyar besumar
ki kehte hain adab se sab Be-Adab mujhko